Prithu Gupta
अपने बारे में कहूँ क्या?
बस एक अधूरी कविता हूँ,
रोज़ लिखती हूँ,
रोज़ मिटाती हूँ,
मैं गुलज़ार की सी शायरी बनना चाहती हूँ।
वो शायरी जिसके लफ्ज़ सीधे सादे,
वो शायरी जो रखे सच, सपनों के आगे,
वो शायरी जो किसी माँ सी मासूम हो,
वो शायरी जो किसी सिपाही का जूनून हो।
रोज़ लिखते,
रोज़ मिटाते,
मैं वो सब कुछ बनना चाहती हूँ,
मैं ये अधूरी कविता पूरी करना चाहती हूँ!
